Tuesday, July 13, 2010

....सितमगर को प्यार

तुमने दर्दोगम ख्वाब में देखा होगा, हाँ,,
मैंने टूटे ख्वाब पे हुए हर वार को देखा है.

कहते रहो सितम बहुत झेले हैं तुमने,,
हमने सितमगर को प्यार कर देखा है.

जब कुछ था ही नहीं तो बेवफा हम कैसे?
कभी अपने जेहन में तुमने झाँक के देखा है.

पहले ही मोड़ से मुड़ गया करीने से,,
मैंने ऐसा हमसफ़र अपने साथ देखा है.....विवेक
(27th June, 10)

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