"उनको भूलने की कोशिशें हुई 'तमाम',
'तमाम' हम भी हर बार हो गए.
याद आती है अब भी वो सुबहो-शाम
जो भी थे वो सब तार-तार हो गये.
इसी उम्मीद में की हम होंगे एक,
यकीं मानिए, हम सौ बार हो गए.
चले ही गए कुछ कहा भी नहीं,
हम कब से इतने बेज़ार हो गए?
अब गम नहीं किसी के जाने का,
हम तो शायरों में शुमार हो गए.."...विवेक
(9th June, 10)
No comments:
Post a Comment