Saturday, July 24, 2010

... ये बिल्कुल 'यार' है

तेरे "इंतज़ार" पे ऐतबार नहीं होता,,
जब से जाना है , ये तेरा रोज़गार है.

टुकड़ा एक याद का रख, अलग सोया था,,
ख्वाबों में रुलाता है, ये बिल्कुल 'यार' है.

हाथ से निकाल, कलेजा रक्खा था बार-बार,,
सीने में लिए फिरे हो दिल, कहते हो 'प्यार' है !

चिलमन के पीछे से, झुक के वो देखे,,
अब तो दिल इसी 'नज़र' को बेक़रार है.

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