"एक ही दिन में हमने क्या हद कर दी ?
एक ही दिन में वो छिप के जाने लगें.
एक ही दिन में हमने क्या-क्या सोंचा था,
एक ही दिन में ये क्या नज़ारे आने लगें.
एक ही दिन में की नज़र-इ-इनायत,
एक ही दिन में आँख दिखने लगें.
एक ही दिन में चेहरा करीब था,
एक ही दिन में वो मुंह चिढाने लगें." ... विवेक
(4june, 10)
ek din kya ek pal mein suraten badal jati hain...
ReplyDeletenice observation!