नफरत बहुत भारी होती है
आपके वजूद पर लटक जाती है
बटखरा बनकर
आपको हल्का कर देती
जिंदगी के तराजू पर
इस भार से जंजीर बनती है
जिससे सोच जकड़ जाती है
यह ईर्ष्या और लोभ से भी पैनी है
चुभती है थोड़ा सामने
ज्यादा खुद में
आपमें सिर्फ राख बचती है
ये तंदूर पेट नहीं भरता
पानी कर देता है खून को
खौलता रहता है दिन-रात
आप बस भाप की तरह उड़ जाते हैं
सिर्फ कहीं बरसने के लिए

