Friday, August 2, 2019

उड़ रहा हूं अंदर...

आसमान में फूल नहीं खिलते पर,
सुगंध फिजाओं में घुल कर नीली हो जाती है,
उम्र को मैं चल के नहीं जीता,
ठहराव भी नहीं है मील के पत्थरों पर,
मुस्कुराते हुए उड़ रहा हूं अंदर...और अंदर..."कुमार"

No comments:

Post a Comment