Sunday, April 8, 2012

....'रोटी' अब भी उसका सवाल क्यूँ है ?

कुआँ दे दिया पानी ही नहीं, ये हाल क्यूँ है ?

बेहयाई देखिये, पूछते हैं ये परचम लाल क्यूँ है ?

जीने की जुगत में उसने सुबह को शाम कर डाला,
अफ़सोस, 'रोटी' अब भी उसका सवाल क्यूँ है ?


पत्थर को पसीने से पिघला ईमारत खड़ी की थी,

मजदूर ही तो था, उसके मरने पे ये बवाल क्यूँ है ?

भूख से तो कल रात ही टूटा था एक रिश्ता,

कब्र में वो मछली और ऊपर ये जाल क्यूँ है ?

उसने राखों से बटोर ज़िन्दगी उठाई है 'कुमार', अब,

जलो मत कि उसके चेहरे पे ये जलाल क्यूँ है ? .... 



2 comments:

  1. bhuk aur rpti ka yeh rista kyu hai..great..

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  2. bhuk aur roti ka yeh rista kyu hai..gret

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