कुआँ दे दिया पानी ही नहीं, ये हाल क्यूँ है ?
बेहयाई देखिये, पूछते हैं ये परचम लाल क्यूँ है ?
पत्थर को पसीने से पिघला ईमारत खड़ी की थी,
मजदूर ही तो था, उसके मरने पे ये बवाल क्यूँ है ?
भूख से तो कल रात ही टूटा था एक रिश्ता,
कब्र में वो मछली और ऊपर ये जाल क्यूँ है ?
उसने राखों से बटोर ज़िन्दगी उठाई है 'कुमार', अब,
जलो मत कि उसके चेहरे पे ये जलाल क्यूँ है ? ....

bhuk aur rpti ka yeh rista kyu hai..great..
ReplyDeletebhuk aur roti ka yeh rista kyu hai..gret
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