Thursday, July 14, 2011

'दिल्ली' से घूम आये हो ज़रूर......

जिस्त में फिर वही मुकाम आया,,
धोखे से फिर वही तूफ़ान आया.

आगे बढ़ चले थे छोड़ के रकीब,,
वही   "तोहफे"    तमाम    लाया.

बचा के रक्खूं क्यूँ मुहब्बत दिल में, जब
जिगर ही इस "जंग" में काम आया.

अब चलते हैं तेरे इश्क से आगे,,
खातिब उनका यही पैगाम लाया.

'दिल्ली' से घूम आये हो ज़रूर, जो
लोग कहते हैं, देखो बाद-जुबां आया.

2 comments:

  1. Pls change your blog's template.
    मैटर नहीं दिख रहा.

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  2. बहुत अच्‍छा लिखा, खूब

    बचा के रक्खूं क्यूँ मुहब्बत दिल में, जब
    जिगर ही इस "जंग" में काम आया.

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