Tuesday, August 31, 2010

कुछ खुद से, कुछ मिजाज़.....

कुछ खुद से, कुछ मिजाज़ तो कुछ हालात से,
परेशान इतना है वो,
मील के पत्थर पे बैठ पूछता है कितनी दूर और?

थी उम्मीद तो दामन पकड़ बड़ा तेज़ भागा था,
अब सिर्फ साँसे तेज़ हैं,
कदम बढ़ाये है और पूछे है यहाँ से कितनी देर और?

कोशिश तो पुरजोर की है, हर बार उसने वहां,
दर फिर भी दूर रहा,
अब हर हमदर्द कहता है, लगा ले थोडा जोर और.

वो इस तरफ कभी झांकता क्यूँ नहीं, सबब क्या है,
जब भी दिल खोलता हू,
किवाड़ बंद कर लेता है, कहता है कोई चर्चा कर और... विवेक

8 comments:

  1. chalte jana hi saar hai jeevan ka....
    manjil ki or badhte kadamon ke hausle pasht to hote hain ... lekin koi sanjeevani hai jo badhne ki or prerit karti hai!
    charchaon ka daur bhi shuru hoga!
    acchi rachna hai....
    subhkamnayen!

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  2. Sanjeevnai....sangjeevani ! usi ka intazaar hai Anupama ji. utsaahvardhan ke liye Dhanyawaad.

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  3. Vivek,,,,,,,, very serious for such a young person.... But very powerful.......

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  4. itna bhi gambhir mat ho bhai mai tention me aa jaunga...

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  5. gazab....vivek ki aisi viveki baatein..bahut khoob...kaunse smndr me doob k likhte ho...bahut gehraai hai inme......carry on...shivani

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  6. यहाँ बातो का नहीं सार्थक प्रयास और निरंतर अभिव्यक्ति क़ी बात है.... !!!
    रही बात , गंभीरता क़ी, वो तो है ही तुम्हारे सोच में......
    और मेरे ख़याल से बिना गंभीर सोच क हम कुछ भी नहीं लिख सकते,.....
    न ही किसी सोच को विकसित कर सकते हैं................
    """ तुमने बहुत कमल लिखा है, सबसे बड़ी बात ... सही सोच के साथ सही रास्ता अपनाना , चाहे कोई कुछ भी सोचे...

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  7. यहाँ बातो का नहीं सार्थक प्रयास और निरंतर अभिव्यक्ति क़ी बात है.... !!!
    रही बात , गंभीरता क़ी, वो तो है ही तुम्हारे सोच में......
    और मेरे ख़याल से बिना गंभीर सोच क हम कुछ भी नहीं लिख सकते,.....
    न ही किसी सोच को विकसित कर सकते हैं................
    """ तुमने बहुत कमाल लिखा है, सबसे बड़ी बात ... सही सोच के साथ सही रास्ता अपनाना , चाहे कोई कुछ भी सोचे...

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  8. परेशान इतना है वो,
    मील के पत्थर पे बैठ पूछता है कितनी दूर और?

    कमाल...

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