तेरी ख़ुफ़िया ख़ामोशी में खलल डालूँगा,,
यकीनन ये सुरत-ए-हाल मै बदल डालूँगा.
चंद लकीरें अब नहीं लेंगी मेरा फैसला,,
मै अपनी मुट्ठी कस के मसल डालूँगा.
इंतजार में तेरे वक़्त काफी गुज़र गया,,
अभी लम्हा एक और, एक और डालूँगा.
इन दीवारों को इस कदर मत देखो घूर के,,
कहा था न रंगों में तेरी शकल डालूँगा.
ना काबिल मै ऐसा नहीं हूँ 'कुमार',,
कि बात दिल की हो, मै अकल डालूँगा..... कुमार
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