जंगलों में हालात क्या ख़ाक अच्छे हुए हैं ?
यहाँ भूख में लिपटे फिर कुछ बच्चे हुए हैं.
जतन कर लो जताने की खुद को जितना,
ये लोग बस रकीबी में ही अच्छे हुए हैं.
रोते हो जिस फांकाकशी पे तुम दिनोरात,
इसी गरीबी को नोंच कई पट्ठे हुए हैं.
जागते रहो नींद में भी "कुमार"
सपने देखे तो ही वो सच्चे हुए हैं.
यहाँ भूख में लिपटे फिर कुछ बच्चे हुए हैं.
जतन कर लो जताने की खुद को जितना,
ये लोग बस रकीबी में ही अच्छे हुए हैं.
रोते हो जिस फांकाकशी पे तुम दिनोरात,
इसी गरीबी को नोंच कई पट्ठे हुए हैं.
जागते रहो नींद में भी "कुमार"
सपने देखे तो ही वो सच्चे हुए हैं.
sahi hai.....last wala kuchh samjhao.
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