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हालात बदल जाते हैं तो सवालात बदल जाते हैं,
जो साथ रहते हैं उनके खयालात बदल जाते हैं.
मिलना गले तो इतिहास की बात हो गई,
अब तो हाथ भी बढाने के अंदाज़ बदल जाते हैं.
रोटी जब भूख को ललचाने लगे बार-बार,
यकीनन माँ-बाप के भी ज़ज्बात बदल जाते हैं.
घूर के ही सही कभी इन आँखों में देख लेना,
नज़रों से भी कई बार अलफ़ाज़ बदल जाते हैं.
पत्थरों से टकरा के मिट्टियाँ लाल नहीं होती 'कुमार',
खून पे खून का रंग चढ़ा निजाम बदल जाते हैं …।
