Thursday, August 4, 2011

मुमकिन नहीं दिल का औंजार होना....

जंगलों, देखा है किस्मत ख़राब होना,
छोटी सी खबर, उसका अख़बार होना.

जिंदा ज़ली हुई लड़की की तस्वीर,
फिर इसी किस्से का बार-बार होना.

भूख, रोटी से ज्यादा है हवस की,
ख़ामोशी, जैसे दिल्ली और सरकार होना.

मोहब्बत में 'जिद्द' का ज़िक्र ऐसा,
कारोबार है कत्ल-ए-ऐतबार होना.

किस-किस का गिला करें 'कुमार'
मुमकिन नहीं दिल का औंजार होना.... कुमार