Wednesday, April 6, 2011

मै दिल्ली हूँ.............

वो छेड़ता है साज़-ए-मोहब्बत बार-बार,,
दिल में छाती है याद-ए-नफरत बार-बार.

वो लुटेरा है, लूटता है ऐतबार,,
मै दिल्ली हूँ, लुटता हूँ बार-बार.
...
कर लो सितम हज़ार पर मुझे याद है,,
गौरी और चींटी का चढ़ना बार-बार.

तीरों से कम नहीं तोहमत तेरी मियां,,
चुभती है जिगर में, वो भी बार-बार.

हर बात पे तेरी अशार आते हैं 'कुमार'
सिर्फ हंस देता है वो रो-रो के बार-बार......विवेक